भोपाल. भारतीय टीम में बाबू भाई कहलाने वाली शहडोल की पूजा वस्त्राकर लड़कों से शर्त लगाकर मैच खेलना पसंद है। परिवार में उसे सब छोटी बुलाते हैं, क्योंकि वह सात भाई-बहनों में सबसे छोटी है, लेकिन उसके सपने बड़े थे और उन्हें पूरा करने का हौसला भी। भारतीय क्रिकेट टीम की आलराउंडर पूजा वस्त्राकर मप्र के शहडोल की रहने वाली हैं। उनकी बड़ी बहन निशा उसकी सफलता से खुश हैं। वह कहती हैं- जब हम शहर में निकलते हैं तो लड़कियां कहती हैं- देखो पूजा की दीदी जा रही हैं। फिर पूछती हैं, जब पूजा घर आए तो हमें बताना, उसके साथ सेल्फी लेनी है।
पूजा वस्त्राकर मीडियम पेसर और राइट हैंड बैटिंग करती हैं। पूजा को टीम इंडिया की जर्सी पहनने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी है। उनके साथ कुछ पल ऐसे भी आए, जब लगा कि वह टीम इंडिया के लिए खेल नहीं पाएंगी। 2016 में पूजा का फील्डिंग के दौरान घुटने मुड़ने से चोटिल हो गईं और वह 2017 में वनडे वर्ल्ड कप के लिए सिलेक्ट नहीं हो पाईं। 2018 में उन्हें पहली बार दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टीम इंडिया में वनडे सीरीज के लिए चुना गया। इसके बाद टी 20 के लिए भी चुनी गईं। यहां फिर दुर्भाग्य ने पूजा का पीछा नहीं छोड़ा। टी-20 वर्ल्ड कप प्रैक्टिस मैच के दौरान उनके घुटने में चोट लगी और वह वर्ल्ड कप से बाहर हो गई थीं। इसके बाद भी पूजा ने हार नहीं मानी। उनके दोनों घुटनों का ऑपरेशन हुआ औ उन्हें बेंगलुरू में नेशनल क्रिकेट अकादमी में रिहैब दिया गया था। सितंबर 2019 में पूजा ने टीम इंडिया में वापसी की।
वापसी की कोशिश में लेती थीं प्रेरणा
टीम में फिर से वापसी की कोशिश में जुटी पूजा लगातार खुद को प्रेरित करती रहती थीं। उन्होंने अप्रैल 2019 में ट्वीटर पर लिखा था- मत पूछ मुझसे, मंज़िल क्या हैं, चल पड़ा हूं मैं। सफर जरूरी क्या है, जिद्द है मेरी, बस कर दिखाना है, लाख बार गिर जाऊं। फिर से दौड़ जाना है, ये चाह है मेरी, फिर क्या बहाना है, मत पूछ मुझसे, ये सफर अनजाना है। सितंबर 2019 में पूजा ने भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी की। इसके बाद जनवरी में टी 20 चैंलेंजर ट्रॉफी खेलते हुए अपनी टीम के लिए 19 गेंदों में 42 रन का स्कोर किया था।
कैरम के चैंपियन हैं पूजा के पिता
पूजा के पिता बंधनराम वस्त्राकर बीएसएनएल में बाबू थे। वह कैरम के अच्छे खिलाड़ी हैं और विभागीय प्रतियोगिता में चैंपियन भी रह चुके हैं। उनके दो बेटे और 5 बेटियां हैं। एमकॉम की पढ़ाई कर रही पूजा की बहन निशा ने बताया- पूजा ने पापा से जाते हुए कहा था, हम वर्ल्ड कप जीतकर आएंगे। अब हमें इंतजार है, जब पूजा और उसकी टीम देश के लिए विश्वकप जीतकर लाएगी।
अब आलोचक भी गर्व करते हैं
पूजा का फेवरेट खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग है। निशा ने बताया कि कॉलोनी में उनके क्रिकेट खेलने पर जो लोग ताने मारते थे। कहते थे- "पढ़ती-लिखती नहीं है, जब देखो लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती है रहती है। हमारे बच्चों पर भी गलत असर पड़ेगा।" वही लोग, आज उस खिलाड़ी के शहर आने पर गर्व का अनुभव करते हैं और मिलने के लिए घर के बाहर जुट जाते हैं। पूजा जब 10 साल की थी, तब उसकी मां की मौत हो गई।
15 साल की उम्र में मप्र टीम के लिए चुनी गई थीं
अपनी कॉलोनी के पास उन लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना शुरू किया, जो मैदान में खेला करते थे। बाद में उन्होंने स्टेडियम में जाना शुरू किया और नेट बल्लेबाजी का अभ्यास किया जहां कोच आशुतोष श्रीवास्तव ने उन्हें खोजा और औपचारिक प्रशिक्षण शुरू किया। उन्होंने बल्लेबाजी शुरू की। 2015 में उन्हें मध्य प्रदेश टीम में शामिल किया गया। यहां पर उन्होंने गेंदबाजी में कदम रखा। पहले ही साल वह इंडिया ग्रीन टीम का हिस्सा बन गई थीं।
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https://ift.tt/2xl1QG8 March 07, 2020 at 11:42PM
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